बीते दिनों एआई समिट के दौरान चर्चा में गआई नोएडा की गलगोटिया यूनिवर्सिटी एक बार फिर सुर्खियों में है। यहां यूनिवर्सिटी की छात्राओं के बीच जबरदस्त हाथापाई का वीडियो सामने आया है। ऐसे में कैंपस में सुरक्षा और अनुशासन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हुए हैं। बताया गया कि यूनिवर्सिटी परिसर में हाथापाई करने वाली दोनों लड़कियां दोस्ती ही थीं। उन दोनों में किसी लड़के लेकर विवाद हुआ और फिर नौबत हाथापाई तक आ गई।
वीडियो में देखा जा सकता है कि दोनों छात्राएं एक दूसरे के बाल पकड़कर थप्पड़बाजी कर रही हैं। आसपास कई छात्र और छात्राएं भी मौजूद हैं। अन्य छात्र झगड़ा रोकने की जगह वीडियो बना रहे हैं। इस घटना की वजह से गलगोटिया यूनिवर्सिटी के प्रशासन पर भी सवाल खड़े हुए हैं।
बताया गया कि दोनों ही लड़कियां करीबी दोस्त थीं। उन दोनों में दिक्कत तब बढ़ी जब एक लड़की को दोस्त के बॉयफ्रेंड पर क्रश हो गया। ‘घर का कलेश’ सोशल मीडिया हैंडल पर कैप्शन में लिखा गया कि गलगोटिया विश्वविद्यालत में पढ़ने वाली दो सहोलियों के बीच बॉयफ्रेंड को लेकर झगड़ा हो गया।
वीडियो में देखें तो दोनों लड़कियां सीढ़ियों के पास भिड़ गईं। वहीं एक अन्य छात्रा दोनों को अलग करने का भी प्रयास कर रही है लेकिन दोनो एक दूसरे को छोड़ने को तैयार ही नहीं हैं। आसपास लोग वीडियो बना रहे हैं। इस वीडियो को देखकर सोशल मीडिया पर लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई लोगों ने कहा कि यूनिवर्सिटी का कमाल है कि किसी ना किसी बात को लेकर सुर्खियों में बनी ही रहती है।
बता दें कि एआई इंपैक्ट समिट के दौरान गलगोटिया यूनिवर्सिटी के काउंटर पर मौजूद रोबोटिग डॉग पर भी विवाद हो गया था। गलगोटिया ने दावा किया था कि इस रोबोट को उन्होंने डिवेलप किया है। बाद में सारा फर्जीवाड़ा सामने आ गया और यूनिवर्सिटी की टीम को तत्काल एआई समिट एक्सपो को खाली करने का आदेश दे दिया गया। दावा किया गया कि यह असल में चीन की कंपनी का रोबोटिक मॉडल है। चाइना पल्स ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि यह वही मॉडल है जिसका प्रदर्शन चीन की रोबोटिक्स कंपनी भी कर चुकी है। बाद में स्पष्ट हो गया कि यह मॉडल चीन की कंपनी यूनिट्री रोबोटिक्स का है। इसे चीन से ही खरीदा गया था। वहीं यूनिवर्सिटी ने सफाई देते हुए कहा था कि यह दावा किया ही नहीं गया कि इसे भारत में डिवेलप किया गया है। इसे छात्रों की पढ़ाई के लिए लाया गया था। वहीं जो वीडियो वायरल हुआ था उसमें कहा गया था कि इसे यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने तैयार किया है।
