
चार धाम यात्रा सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की भी बड़ी ताकत है… लेकिन इसी चारधाम से जुड़े होटल और होम स्टे कारोबारी अब अपनी समस्याओं को लेकर प्रशासन के सामने खुलकर आवाज उठा रहे हैं। देहरादून स्थित गढ़वाल आयुक्त कार्यालय में शीतकालीन यात्रा संबंधी बैठक में चारधाम होटल एसोसिएशन ने अपना पक्ष मजबूती से रखा.. एसोसिएशन ने चारों धामों की जमीनी परेशानियों से अधिकारियों को अवगत कराया और मांगों को लेकर ज्ञापन भी सौंपा।
चारधाम जहां हर साल लाखों श्रद्धालु आस्था के साथ पहुंचते हैं और जहां की यात्रा से हजारों स्थानीय परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी है।लेकिन चारधाम से जुड़े होटल और होम स्टे संचालकों का कहना है कि जमीनी स्तर पर कई ऐसी समस्याएं हैं, जिनका समाधान जरूरी है।इन्हीं मुद्दों को लेकर 3 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे पौड़ी में आयुक्त गढ़वाल मंडल की शीतकालीन यात्रा बैठक में चारधाम होटल एसोसिएशन का प्रतिनिधिमंडल पहुंचा। में एसोसिएशन ने चारों धामों में होने वाली परेशानियों को अधिकारियों के सामने रखा और समस्याओं के समाधान की मांग की।
सिर्फ मौखिक शिकायत नहीं बल्कि एसोसिएशन की ओर से ज्ञापन भी सौंपा गया। जिसमें साफ संदेश है—चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं के साथ उन लोगों की समस्याओं पर भी ध्यान दिया जाए, जिनका कारोबार और रोजगार सीधे तौर पर यात्रा से जुड़ा है।
बैठक में चारधाम होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश मेहता के सानिध्य में यमुना घाटी होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष सोबन सिंह राणा, विधि सलाहकार शैलेश ध्यानी, महासचिव निखिलेश सेमवाल और सोशल मीडिया प्रभारी विशेश्वर प्रसाद नैथानी मौजूद रहे।एसोसिएशन ने प्रशासन के सामने चारधाम क्षेत्रों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए उम्मीद जताई कि संबंधित मुद्दों पर गंभीरता से कार्रवाई होगी.
चारधाम यात्रा को सफल बनाने में श्रद्धालुओं की सुविधाओं के साथ-साथ स्थानीय कारोबारियों की भूमिका भी बेहद अहम है। यही वजह है कि होटल और होम स्टे संचालक अब अपनी समस्याओं को लेकर प्रशासन के सामने मुखर हो रहे हैं। पौड़ी में हुई बैठक में ज्ञापन सौंपकर एसोसिएशन ने साफ कर दिया है कि चारधाम से जुड़े कारोबारियों की समस्याओं को भी यात्रा व्यवस्था के एजेंडे में प्रमुख जगह मिलनी चाहिए।
